मानव पूंजी: विकसित भारत के लिए शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार में निवेश

1. प्रस्तावना: मानव पूंजी - 21वीं सदी का नया स्वर्ण मानक

आर्थिक विमर्श में 'आर्थिक संवृद्धि' (Economic Growth) और 'आर्थिक विकास' (Economic Development) के मध्य का सूक्ष्म अंतर ही किसी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति को परिभाषित करता है। जहाँ संवृद्धि केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मात्रात्मक विस्तार तक सीमित है, वहीं विकास एक गुणात्मक रूपांतरण है जो नागरिकों के जीवन-स्तर और उनकी क्षमताओं में सुधार सुनिश्चित करता है। विकसित भारत @2047 का विज़न केवल भौतिक बुनियादी ढांचे के विस्तार से पूर्ण नहीं हो सकता; इसके लिए 'मानव पूंजी' में निवेश अनिवार्य है। भारत आज एक ऐसे संरचनात्मक परिवर्तन (Structural Transformation) के दौर से गुजर रहा है, जहाँ कृषि से उद्योगों और उच्च-मूल्य सेवाओं की ओर प्रस्थान करने के लिए एक कुशल कार्यबल की आवश्यकता है।

वर्तमान बजट 2026-27 का राजकोषीय विन्यास इसी 'मानव-केंद्रित विकास' की ओर एक रणनीतिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। भारत के पास वैश्विक स्तर पर अद्वितीय 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) है, जिसे राष्ट्र की शक्ति में बदलने के लिए यह बजट एक व्यापक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करता है।

2. शिक्षा का पुनर्गठन: बुनियादी साक्षरता से वैश्विक मानकों तक

शिक्षा के क्षेत्र में ₹1,39,289.48 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन केवल एक वित्तीय आँकड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत 'सिस्टम-वाइड रीसेट' के प्रति सरकार की राजकोषीय प्रतिबद्धता है। कुल बजटीय आवंटन में 8.27% की संवृद्धि, जिसमें उच्च शिक्षा के लिए 11.28% और स्कूली शिक्षा के लिए 6.35% की वृद्धि शामिल है, परीक्षा-केंद्रित प्रणाली से हटकर 'योग्यता-आधारित मूल्यांकन' (Competency-based assessment) की ओर बढ़ने का संकल्प है।

इस सुधार को संस्थागत सुदृढ़ीकरण प्रदान करने हेतु एक उच्च-स्तरीय 'शिक्षा से रोजगार और उद्यम' (Education to Employment and Enterprise) स्थायी समिति का प्रस्ताव रखा गया है। यह समिति उभरती हुई प्रौद्योगिकियों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव का विश्लेषण करेगी और शिक्षा एवं उद्योग के मध्य 'अभिसरण' (Convergence) सुनिश्चित करेगी।

बजट 2026-27 की प्रमुख शैक्षिक पहल

पहल

विवरण

रणनीतिक उद्देश्य

AVGC लैब

15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में लैब की स्थापना।

रचनात्मक अर्थव्यवस्था (Creative Economy) हेतु विशेषज्ञ कार्यबल तैयार करना।

यूनिवर्सिटी टाउनशिप

औद्योगिक कॉरिडोर के समीप 5 टाउनशिप का निर्माण।

शोध, नवाचार और उद्योग-अकादमिक एकीकरण को बढ़ावा देना।

STEM एवं महिला छात्रावास

प्रत्येक जिले में विज्ञान एवं तकनीक हेतु समर्पित छात्रावास।

उच्च शिक्षा और नवाचार में लैंगिक समानता सुनिश्चित करना।

खगोल भौतिकी अवसंरचना

4 टेलीस्कोप सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण/स्थापना।

उच्च-स्तरीय अनुभवात्मक शिक्षण और वैज्ञानिक संस्कृति का विकास।

3. कौशल विकास: 'स्किल पैराडॉक्स' और उत्पादकता आधारित वृद्धि

भारत वर्तमान में एक 'स्किल पैराडॉक्स' का सामना कर रहा है, जहाँ वैश्विक AI प्रतिभा पूल का 16% हिस्सा होने के बावजूद, केवल 25% से कम स्नातक उद्योग की भूमिकाओं हेतु 'जॉब-रेडी' हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए बजट का केंद्रबिंदु केवल प्रशिक्षण की संख्या (Volume) पर नहीं, बल्कि 'कार्यस्थल तत्परता' (Workplace Readiness) पर है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 4.0 के माध्यम से 25 लाख से अधिक युवाओं को AI, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक जैसे भविष्य के कौशलों में प्रशिक्षित किया जा चुका है।

प्रशिक्षुता (Apprenticeship) के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए नीति आयोग की सिफारिशों के आधार पर एक 'Apprenticeship Engagement Index' प्रस्तावित किया गया है, जो प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) के माध्यम से राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को जन्म देगा।

  • शिक्षुता और MSME क्लस्टर: 'सीखते हुए कमाने' (Earn while you Learn) की संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु MSME क्लस्टर मॉडल के तहत साझा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
  • औद्योगिक संरेखण: ₹60,000 करोड़ की लागत से ITI संस्थानों को गतिशील कौशल केंद्रों में परिवर्तित किया जा रहा है ताकि वे बदलती औद्योगिक मांग के अनुरूप हों।
  • मानकीकरण: कौशल प्रमाणन को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है ताकि भारतीय युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार सुलभ हो सके।

4. रोजगार सृजन: प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना

रोजगार को केवल आय के साधन के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिरता और आर्थिक दक्षता के उत्प्रेरक के रूप में देखा जाना चाहिए। 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना' इसी अवधारणा पर आधारित है, जिसका लक्ष्य आगामी दो वर्षों में विनिर्माण एवं अन्य क्षेत्रों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजित करना है।

इस योजना की संरचना में निम्नलिखित नीतिगत स्पष्टता है:

  • पात्रता और समय-सीमा: यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगारों पर लागू होगी, जिसमें ₹1 लाख प्रति माह तक के वेतन वाले कर्मचारी पात्र होंगे।
  • प्रोत्साहन संरचना: पहली बार नियुक्त होने वाले कर्मचारियों (नया UAN) को ₹15,000 का प्रोत्साहन दो किस्तों (छह-छह माह के अंतराल पर) में दिया जाएगा।
  • नियोक्ता समर्थन: प्रत्येक नए कर्मचारी को 6 महीने तक स्थिर रोजगार प्रदान करने पर नियोक्ताओं को ₹3,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
  • बजटीय आवंटन: इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु ₹99,446 करोड़ की विशाल राशि आवंटित की गई है, जो 'इकोनॉमिक वैल्यू' और 'सोशल सिक्योरिटी' के अंतर्संबंधों को सुदृढ़ करती है।

5. उभरते क्षेत्र और समावेशी विकास: भविष्य की तैयारी

विकसित भारत का विज़न समावेशिता के बिना अधूरा है। बजट 2026-27 दिव्यांगजनों और स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों के लिए विशिष्ट रणनीतियाँ प्रस्तुत करता है।

  • स्वास्थ्य सेवा एवं मेडिकल टूरिज्म: 10 चयनित विषयों में 1 लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHPs) का प्रशिक्षण और चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु 5 क्षेत्रीय हब की स्थापना की जा रही है। साथ ही, युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य हेतु उत्तर भारत में NIMHANS की तर्ज पर नए संस्थानों की स्थापना की जाएगी।
  • दिव्यांगजन सशक्तिकरण: 'दिव्यांगजन कौशल योजना' के साथ-साथ 'दिव्यांग सहारा योजना' के तहत ALIMCO के माध्यम से सहायक उपकरणों में AI एकीकरण और आधुनिक 'असिस्टिव टेक्नोलॉजी मार्ट्स' की स्थापना की जाएगी।
  • पर्यटन और खेल: प्रतिष्ठित स्थलों के लिए IIMs के सहयोग से 10,000 गाइडों की 'अपस्किलिंग' और 'खेलो इंडिया मिशन' के माध्यम से खेल संस्कृति का एकीकरण समावेशी प्रतिभा विकास के उदाहरण हैं।

6. निष्कर्ष: विकसित भारत @2047 का विज़न और युवाओं की जिम्मेदारी

निष्कर्षतः, मानव पूंजी में निवेश केवल एक बजटीय आवंटन नहीं है, बल्कि यह भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को राष्ट्र की वास्तविक शक्ति में रूपांतरित करने का एक सशक्त माध्यम है। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के शब्दों में, "विकास स्वतंत्रताओं का विस्तार है।" शिक्षा, कौशल और रोजगार में यह निवेश ही वह माध्यम है जो भारतीय युवाओं को अभावों से मुक्त कर उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।

बजट 2026-27 उत्पादकता आधारित संवृद्धि (Productivity-Led Growth) का एक दूरदर्शी खाका है। अब यह युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे इन अवसरों को आत्मसात कर स्वयं को एक विकसित राष्ट्र के निर्माता के रूप में स्थापित करें। यदि हम अपने कार्यबल की उत्पादकता को सही दिशा दे सके, तो 2047 तक भारत न केवल आत्मनिर्भर होगा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक 'ग्लोबल स्किलिंग हब' के रूप में अपनी अमिट पहचान बनाएगा।

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